बहुत हम-साए इस गुलशन के ज़ंजीरी रहा हूँ मैं — मीर तक़ी मीर
“I have been a caged bird in this garden, much like you; perhaps you too have heard my cry from the streams.”
अर्थ
मैं इस बाग़ के गुलशन में तुम्हारी तरह एक क़ैदी पंछी सा रहा हूँ; शायद तुमने भी नाले का मेरा शोर सुना होगा।
विस्तार
यह शेर ज़िंदगी की खूबसूरती और उसकी क़ैदियत के बीच के फ़र्क़ को समझाता है। शायर कह रहे हैं कि यह गुलशन, जो बाहर से कितना भी हसीन लगे, असल में एक पिंजरे जैसा है। 'नालों का शोर' उस अंदरूनी दर्द, उस अनकहे ग़म को दिखाता है जो सब देखते नहीं। वह अपने महबूब से कहता है कि मेरे इस अंदर के शोर को भी तो तुमने कभी सुना होगा, मेरी तन्हाई के साये को भी तो महसूस किया होगा।
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