क़यामत कर के अब ता'बीर जिस को करती है ख़िल्क़त — मीर तक़ी मीर
“The creation that can interpret the Day of Judgment, Perhaps in that alleyway, a ditch must have formed.”
अर्थ
वह शायर जो क़यामत के दिन ता'बीर कर सकता है, शायद उस गली में एक नाला बन गया होगा।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर का कमाल है, जो ब्रह्मांड के बड़े नज़ारे को रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जोड़ता है। शायर कहते हैं कि क़यामत... यानी दुनिया का अंत, एक ऐसा इवेंट है जिसकी ता'बीर पूरी कायनात करेगी। लेकिन कल्पना कीजिए... कि इस महा-घटना का असर भी किसी गली के छोटे से 'आशूब' जितना होगा! यह इंसानी ज़िंदगी की नज़ाकत और ब्रह्मांड की विशालता के बीच का फ़र्क़ बयां करता है।
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