मईशत हम फ़क़ीरों की सी इख़वान-ए-द-ज़माँ से कर — मीर तक़ी मीर
“If we, poor folks, should receive any insult from the brethren of this age, Say that it will be good, my brother, it will be good.”
अर्थ
हम फ़क़ीरों की तरह हैं कि अगर इस ज़माने के भाई-बहनों से हमें कोई गाली भी मिल जाए, तो भी यह कह देना कि यह अच्छा होगा, भाई, यह अच्छा होगा।
विस्तार
यह शेर हमें ज़िंदगी जीने का एक बहुत ही गहरा नज़रिया देता है। शायर कहते हैं कि जीवन को फकीरों की तरह सादगी से जीना चाहिए। और दूसरी पंक्ति में एक कमाल का सबक है: अगर कोई हमें गाली दे भी दे, तो बस 'भला' कह देना काफी है! क्यों? क्योंकि आपका जवाब, आपका सकारात्मक रवैया, उस नकारात्मकता को तुरंत शांत कर देता है। यह है मानसिक शांति और आत्म-नियंत्रण का बेहतरीन उदाहरण।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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