कसो को शौक़ यारब बेश उस से और क्या होगा — मीर तक़ी मीर

कसो को शौक़ यारब बेश उस से और क्या होगा क़लम हाथ आ गई होगी तो सौ सौ ख़त लिखा होगा

“What desire can a beloved possess, other than that for you? If the pen were in hand, countless letters would be written.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

प्रियतम को आपके अलावा और क्या शौक हो सकता है? यदि कलम हाथ में होती, तो सौ-सौ ख़त लिखे जाते।

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर की शायरी में मोहब्बत और कला की ज़बरदस्त मिसाल है। शायर कह रहे हैं कि महबूब का शौक़ (प्यार) ही काफ़ी है; और क्या चाहिए? लेकिन साथ ही, वह अपनी कला का भी ज़िक्र करते हैं, कहते हैं कि अगर हाथ में क़लम आ जाए, तो सैकड़ों ख़त लिखे जा सकते हैं। यह एक ऐसा नज़रिया है जहाँ इश्क़ और तख़ल्लुस दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

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