बिस्तरा था चमन में जों बुलबुल
नाला सर्माया-ए-तवक्कुल था
“The bed was in the garden, where the nightingales were, The stream was the marketplace of reliance.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
चमन में जो बुलबुल का बिस्तरा था, और नाला सर्माया-ए-तवक्कुल था।
विस्तार
यह शेर बहुत गहरे विरोधाभास को दिखाता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कह रहे हैं कि जहाँ एक तरफ़ चमन में बुलबुल का आरामदायक बिस्तरा था, वहीं दूसरी तरफ़ नला, जो पानी का बहाव है, वो असल में 'तवक्कुल' (भरोसे) का बाज़ार है। इसका मतलब है कि जीवन में चाहे कितनी भी प्राकृतिक सुंदरता क्यों न हो, उसमें इंसानी उम्मीदों और दुनियादारी का शोर हमेशा मौजूद रहता है।
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