जब जुनूँ से हमें तवस्सुल था अपनी ज़ंजीर-ए-पा ही का ग़ुल था

“When through frenzy we sought the means, It was the thread of our own shackles that gleamed.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

जब जुनून के माध्यम से हमें तवस्सुल (रास्ता) मिला, तो वह हमारी अपनी ज़ंजीर का ही गुच्छा था।

विस्तार

यह शेर इंसान के संघर्ष की गहरी विडंबना को बयां करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि जब हम किसी जुनून या तीव्र मोहब्बत के सहारे कोई राह ढूंढते हैं, तो हम बाहर की किसी शक्तियों से नहीं लड़ रहे होते। बल्कि, हम तो अपनी ही बनाई हुई ज़ंजीरों के गुलाम होते हैं। यह एक गहरा एहसास है कि हमारी सबसे बड़ी रुकावट हमेशा हमारे भीतर होती है।

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