ये निशान-ए-इश्क़ हैं जाते नहीं — मीर तक़ी मीर
ये निशान-ए-इश्क़ हैं जाते नहीं
दाग़ छाती के अबस धोता है क्या
“These marks of love, they do not depart, What can wash away the stains upon my breast?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
ये इश्क़ के निशान हैं जो मिटते नहीं, छाती के दाग़ अब किससे धोए जाएँगे।
विस्तार
यह शेर इश्क़ की उस गहराई को बयां करता है, जो कभी मिटती नहीं। शायर कहते हैं कि प्यार के निशान.... बस दाग़ नहीं होते, बल्कि वो ज़िंदगी का हिस्सा बन जाते हैं। चाहे आप कितनी भी कोशिश करें, या कितना भी साफ़-सुथरा हो जाएं.... ये यादें, ये एहसास, छाती से कभी नहीं धुलते। यह एक ऐसी मोहब्बत की बात है जो रूह में उतर जाती है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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