मैं तो था सैद-ए-ज़बूँ सैद-गह-ए-इश्क़ के बीच — मीर तक़ी मीर

मैं तो था सैद-ए-ज़बूँ सैद-गह-ए-इश्क़ के बीच आप को ख़ाक में भी ख़ूब मिलाया न गया

“I was between the master of speech and the master of love, yet even in the dust, you were not mixed with me.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

मैं तो वाणी के स्वामी और प्रेम के स्वामी के बीच था, फिर भी आपको धूल में भी मुझसे अच्छी तरह मिलाया नहीं गया।

विस्तार

यह शेर एक बहुत गहरी उलझन को बयान करता है। शायर कहते हैं कि वो भाषा की नज़ाकत और इश्क़ की गहराई के बीच फँसे हुए थे। वो ज़िंदगी जी रहे थे, लेकिन उनका दिल और उनका ज़हन... कहीं एक-दूसरे से अलग थे। और सबसे दर्दनाक बात यह है कि वो महबूब को मौत की धूल में भी नहीं ढूंढ पाए। यह बिछड़न का दर्द है!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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