दिल जो दीदार का क़ातिल के बहुत भूका था — मीर तक़ी मीर
दिल जो दीदार का क़ातिल के बहुत भूका था
उस सितम-कुश्ता से इक ज़ख़्म भी खाया न गया
“Though the heart was very hungry for the sight of the beloved, it was not wounded even by that tormenting lover.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
जब दिल प्रिय के दर्शन को बहुत भूखा था, तब भी उस कष्ट देने वाले से एक ज़ख्म भी नहीं खाया गया।
विस्तार
यह शेर इश्क़ की उस गहरी और जुनूनी कैफियत को बयां करता है। शायर कहते हैं कि जब दिल किसी की दीदार के लिए इतना भूखा हो जाता है, तो वह दर्द को महसूस करना भी छोड़ देता है। उसकी चाहत इतनी तीव्र होती है कि किसी भी सतावे या ज़ख्म का अहसास तक नहीं होता। यह इश्क़ की एक अजीब सी मजबूरी है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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