क्या तुनुक-हौसला थे दीदा-ओ-दिल अपने आह — मीर तक़ी मीर

क्या तुनुक-हौसला थे दीदा-ओ-दिल अपने आह एक दम राज़-ए-मोहब्बत का छुपाया न गया

“What courage was it that you showed, O eyes and heart, with your own sighs, The secret of love could not be kept hidden even for a moment.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

क्या हिम्मत थी कि तुमने अपनी आँखों और दिल से आह भरकर, प्यार का राज़ एक पल के लिए भी छुपा नहीं पाए।

विस्तार

यह शेर उस एहसास को बयां करता है जब प्यार इतना गहरा हो जाए कि उसे छुपाना नामुमकिन हो। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि नज़रों और दिल में कोई हिम्मत ही नहीं थी... कि प्यार का राज़ एक पल के लिए भी छिप सके। यह सिर्फ़ इश्क़ की मजबूरी नहीं, बल्कि उस एहसास की बेबसी है जो इंसान को पूरी तरह से वक़्त पर हावी कर लेता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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