कभू आशिक़ का तिरे जबहे से नाख़ुन का ख़राश — मीर तक़ी मीर

कभू आशिक़ का तिरे जबहे से नाख़ुन का ख़राश ख़त-ए-तक़्दीर के मानिंद मिटाया न गया

“How could the scratch of a nail from your body, my lover, ever erase the letter of destiny?”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

किसी आशिक़ के तिरे माथे से नाखून की खरोंच, कभी भी भाग्य के पत्र के समान मिटाई नहीं जा सकती।

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर ने इश्क़ के गहरे असर को बयां किया है। शायर कहते हैं कि आशिक़ का जबहे पर लगाया गया एक छोटा-सा खरोंच का निशान... वो तो भी मिटाया नहीं जा सकता, जैसे कि तक़दीर की लकीरें मिट जाती हैं। इसका मतलब है कि मोहब्बत के ज़ख्म और यादें, ये वक़्त से कहीं ज़्यादा क़ायम होते हैं। ये एहसास कि प्यार का निशान हमेशा दिल पर रहता है!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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