सुबुक है आवे जो मिंदील रख नमाज़ को शैख़ — मीर तक़ी मीर
सुबुक है आवे जो मिंदील रख नमाज़ को शैख़
रहा है कौन सा अब वक़्त सरगिरानी का
“The Sheikh, who brings the turban for namaz, says, 'Whose time is this, now, for straying and confusion?'”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
जो व्यक्ति नमाज़ के लिए मुंडेर (पगड़ी) लेकर आता है, वह शेख कहता है, 'अब भटकाव और उलझन का समय किसका है?'
विस्तार
ये शेर एक बहुत गहरे सामाजिक और दार्शनिक सवाल को उठाता है। शायर यहाँ एक ऐसे पल की बात कर रहे हैं, जब किसी धार्मिक या सामाजिक व्यवस्था का प्रभाव इतना अधिक हो गया है कि विद्रोह या 'सरगिरानी' के लिए कोई गुंजाइश ही नहीं बची है। यह एक तरह की मजबूरी, एक तरह की हार को दर्शाती है, जब व्यवस्था हावी हो जाती है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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पाठ
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