अगरचे उम्र के दस दिन ये लब रहे ख़ामोश — मीर तक़ी मीर
अगरचे उम्र के दस दिन ये लब रहे ख़ामोश
सुख़न रहेगा सदा मेरी कम-ज़बानी का
“Though for ten days of age these lips remain silent, My speech will forever remain my modest grace.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
अगर मेरे होंठ उम्र के दस दिन तक शांत रहें, फिर भी मेरा वचस् हमेशा मेरी सादगी का प्रमाण रहेगा।
विस्तार
यह शेर कला और अभिव्यक्ति की अमरता को बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि अगर उनके होंठों पर कुछ समय के लिए खामोशी आ जाए, तो भी उनकी शायरी का मिजाज, उनका अंदाज़-ए-बयां, कभी कम नहीं होगा। यह एक गहरा दावा है कि कलाकार की आत्मा और उसकी कला, समय की सीमाओं से परे है। यह कला की शाश्वत शक्ति का प्रमाण है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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