हज़ार जान से क़ुर्बान बे-परी के हैं — मीर तक़ी मीर
“The passion for the beloved is sacrificed with a thousand lives; even the thought of forgetting that love never crossed the mind.”
अर्थ
हज़ार जान से क़ुर्बान बे-परी के हैं; ख़याल भी कभू गुज़रा न पर-फ़िशानी का। इसका अर्थ है कि प्रियतमा के लिए हज़ार जान कुर्बान हैं, और कभी भी उस प्रेम को भुलाने का विचार मन में नहीं आया।
विस्तार
यह शेर सिर्फ प्यार की बात नहीं करता, यह इबादत की बात करता है। शायर कहते हैं कि मैं अपनी जान कुर्बान करने को तैयार हूँ, बस महबूब की एक झलक के लिए। लेकिन सबसे दर्दनाक बात क्या है? कि महबूब को कभी यह एहसास ही नहीं हुआ.... कि मेरा प्यार इतना गहरा है। यह वो दर्द है, जो पूरी शिद्दत से महसूस किया जाता है, पर जिसे सामने वाला कभी समझ नहीं पाता।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
