दिल-ओ-दिमाग़ है अब किस को ज़िंदगानी का — मीर तक़ी मीर

दिल-ओ-दिमाग़ है अब किस को ज़िंदगानी का जो कोई दम है तो अफ़्सोस है जवानी का

“The heart and the mind now question this life's meaning, If one has breath, it is a pity for youth's passing.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

दिल और दिमाग़ अब किस को ज़िंदगी का सवाल है। जो कोई साँस लेता है, उसे जवानी के गुज़र जाने का अफ़सोस है।

विस्तार

यह शेर जीवन की उस गहरी उलझन को बयां करता है, जो दिल और दिमाग़ के बीच होती है। शायर कहते हैं कि अब ज़िन्दगी का कोई मतलब नहीं बचा, और जो भी साँस ले रहा है, उसे बस अपनी बीती जवानी का अफ़सोस है। यह एक बहुत ही मार्मिक एहसास है—समय के गुज़रने का, और उन सुनहरे पलों का जो वापस नहीं आ सकते।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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