ना-तवाँ हम हैं कि हैं ख़ाक गली की उस की — मीर तक़ी मीर
ना-तवाँ हम हैं कि हैं ख़ाक गली की उस की
अब तो बे-ताक़ती से दिल का भी मक़्दूर गया
“Are we not the dust of that alley, oh beloved, that we are? / Now, even the destiny of the heart has departed with weakness.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
क्या हम उस गली की धूल हैं, ऐ प्रिय, या नहीं? अब तो कमजोरी से दिल का भी भाग्य चला गया।
विस्तार
यह शेर बस एक हालत बयान करता है, एक ऐसा दर्द जो जी को झकझोर देता है। शायर कहते हैं कि मैं तो या तो ना-तवाँ हूँ, या बस उस महबूब की गली का धूल का कण। और सबसे बड़ी बात तो यह है कि मेरा दिल भी अब बे-ताक़ती में है, जिसका कोई मक़़दूर ही नहीं बचा। यह इश्क़ की उस हद को बयां करता है, जहाँ वजूद ही खो जाता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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