गोर से नाले नहीं उठते तो नय उगती है — मीर तक़ी मीर

गोर से नाले नहीं उठते तो नय उगती है जी गया पर न हमारा सर पुर-शोर गया

“If the streams do not rise from the channels, then the new do not sprout; but even if our head was full of noise, it did not happen.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

अगर नालों से धाराएँ नहीं उठतीं, तो नए पौधे नहीं उगते; लेकिन अगर हमारा सर शोर से भरा होता, तो भी ऐसा नहीं होता।

विस्तार

देखिए, यह शेर सिर्फ़ जीवन की बात नहीं करता, बल्कि ज़िंदगी के उस पहलू पर बात करता है जहाँ हम खुद को पाते हैं। शायर कहते हैं कि जीवन में कुछ चीजें बस यूँ ही होती रहती हैं, पर क्या वो चीज़ें हमें पहचान दिला पाती हैं? यह एक गहरी निराशा है... एक एहसास कि जी तो लिया, पर अपनी छाप नहीं छोड़ पाए। यह उन लोगों के लिए है जिनकी ज़िंदगी शांत गुज़र गई, बिना किसी बड़े शोर या कामयाबी के!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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