Sukhan AI
जाती है नज़र ख़स पे गह-ए-चश्म परीदन
याँ हम ने पर-ए-काह भी बे-कार न पाया

The gaze falls upon the jasmine, adorned with the curtain of the eyes; / We, however, could not find any use for the feather of the wing.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

नज़र खस पर गह-ए-चश्म परीदन जाती है, और हमने पर-ए-काह भी बे-कार न पाया।

विस्तार

यह शेर महबूब के नज़रों के जादू का बयान है। शायर कहते हैं कि जब नज़र किसी की आँखों के गहने पर पड़ती है, तो इंसान खुद को खो देता है। वो इतना मदहोश हो जाता है कि उसे अपनी सुरक्षा के लिए बनी हुई हर चीज़—यहां तक कि आँखों के पंजों जैसा कोमल परदा—भी बेकार लगने लगता है। यह बेबस इश्क़ का बेहतरीन नज़ारा है।

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