तस्वीर के मानिंद लगे दर ही से गुज़री मज्लिस में तिरी हम ने कभू बार न पाया

“Like a photograph, the passage of your presence was seen, In the gathering, we never found your sight.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

तस्वीर जैसी लगी दर से गुज़री, महफ़िल में तेरी हम ने कभी बार न पाया।

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर के दिल की गहराई को बयां करता है। शायर कहते हैं कि महबूब की सूरत तो कभी-कभी यूँ गुज़र जाती है, जैसे कोई तस्वीर... बस नज़र आती है। लेकिन जब वह असल मजलिस में होते हैं, तो वह कभी भी मिल नहीं पाते। यह उस दर्द को दिखाता है जब कोई चीज़ बस दिखाई देती है, लेकिन पकड़ में कभी नहीं आती। एक ख्वाब और हकीकत के बीच का ये फ़ासला, कितना गहरा होता है!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.