आग में ग़म की हो के गुदाज़ाँ जिस्म हुआ सब पानी सा
या'नी बिन इन शोला-रुख़ों के ख़ूब ही हम भी ताए गए
“As if my body, consumed by the fire of sorrow, became like water; Meaning, without the glow of your face, my beauty also has faded away.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
आग के ग़म से गुदाज़ा जिस्म पानी जैसा हो गया, मतलब इन शोला-रुख़ों के बिना मेरी ख़ूबसूरती भी फीकी पड़ गई।
विस्तार
यह शेर महबूब की खूबसूरती के असर को बयां करता है। शायर कहते हैं कि मेरा ग़म ऐसा है कि जैसे शरीर आग में पानी बन गया हो। लेकिन, इस हालत में भी, वो मानते हैं कि असली तबाही, असली टूटना, महबूब की इन शोला-सी नज़रों से दूर हो जाना है। यह इश्क़ की वो हालत है जहाँ वजूद ही महबूब के जादू में खो जाता है।
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