अल्लाह रे ये दीदा-दराई हूँ न मुकद्दर क्यूँके हम आँखें हम से मिलाए गए फिर ख़ाक में हम को मिलाए गए

“Oh Allah, I am afraid of this sight, but why, O destiny, did you bring us together, only to reunite us in the dust?”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

अल्लाह रे, ये दीदा-दराई हूँ न मुकद्दर क्योंके हम, आँखें हम से मिलाए गए फिर ख़ाक में हम को मिलाए गए। हे अल्लाह, यह दृश्य मुझे डराता है, लेकिन क्यों, हे तकदीर, आपने हमें आँखें दिखाकर मिलाया, और फिर हमें मिट्टी में मिला दिया।

विस्तार

यह शेर एक ऐसे इश्क़ की कहानी कहता है, जो हर बंधन से परे है। शायर कहते हैं कि मुझे न दुनिया की नज़रों से डर है, न किस्मत के किसी फेरे से। क्यों? क्योंकि मैंने अपने जीवन का सबसे गहरा पल, महबूब की आँखों में देखा है। और अगर आँखों से मिलना मुमकिन है, तो मौत की ख़ाक में मिलना तो बस एक रस्म है!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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