उट्ठे नक़ाब जहाँ से यारब जिस से तकल्लुफ़ बीच में है
जब निकले उस राह से हो कर मुँह तुम हम से छुपाए गए
“From where the veil lifts, my beloved, where the conversation is strained, When you depart that path, turning your face away from us, we are left.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
शायर कह रहा है कि जहाँ से नक़ाब उठेगा, जहाँ बात में झिझक है, जब तुम उस रास्ते से गुज़रकर अपना मुँह हमसे छिपा लोगे, तब हम अकेले रह जाएँगे।
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ विरह की बात नहीं करता.... यह तो उस गहरे दर्द की बात करता है जो अचानक मिल जाता है। शायर कहते हैं कि हमें उस रास्ते की तकलीफ से डर नहीं लगना चाहिए.... असली दर्द तो तब होता है जब वो महबूब.... मुँह छुपाकर कहीं चले जाए। यह दूरी नहीं.... यह तो दिल के टूटने जैसा है!
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