ताज़गी दाग़ की हर शाम को बे-हेच नहीं — मीर तक़ी मीर

ताज़गी दाग़ की हर शाम को बे-हेच नहीं आह क्या जाने दिया किस का बुझाया हम ने

“The stain of freshness is not restless every evening, Ah, what can I say, whose fire have we extinguished?”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

ताज़गी दाग़ की हर शाम को बे-हेच नहीं, आह क्या जाने दिया किस का बुझाया हम ने। इसका अर्थ है कि ताज़गी के दाग़ हर शाम को बेचैन नहीं होते, आह, क्या जानें हमने किसका बुझा दिया।

विस्तार

मिर्ज़ा तक़ी मीर साहब यहाँ भावनाओं और कार्यों की अप्रत्याशित प्रकृति के बारे में बात कर रहे हैं। वह बताते हैं कि जीवन के हर पल की चमक हमेशा स्पष्ट नहीं होती, और सबसे बड़े रहस्य उन बातों में छिपे हैं जो हम बिना सोचे-समझे करते हैं। यह हमारे हर फ़ैसले के गहरे असर पर एक चिंतन है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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