“It is not difficult for us, that the path of her street, Even if it is a hundred leagues from our heart.”
हमसे तो जाया नहीं जाता कि यकसर दिल में वह दो-क़दम उस की गली की राह सौ फ़र्ंग हैं। (अर्थात्, यह असंभव नहीं है कि दिल में बस दो कदम की दूरी पर भी वह गली है, जिसकी राह सौ फ़र्ंग दूर है।)
यह शेर प्रेम की उस अदम्य शक्ति को बयां करता है, जहाँ दूरी सिर्फ़ फ़ासला नहीं होती, बल्कि एहसास बन जाती है। शायर कहते हैं कि महबूब की गली से जाना तो आसान है, पर उस गली की राह... वह दो कदम भी, दिल में सौ फ़र्ंग की दूरी पैदा कर देती है। यह उस बेचैनी को दिखाता है जब यादें, नज़दीकी को भी दूर कर देती हैं।
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