जी ठहर जाए या हवा होवे — मीर तक़ी मीर
जी ठहर जाए या हवा होवे
देखिए होते होते क्या होवे
“Whether one stays put or becomes the wind, See what happens as time moves on.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
चाहे व्यक्ति स्थिर रहे या हवा बन जाए, यह देखिए कि समय के साथ क्या होता है।
विस्तार
यह शेर जीवन की अनिश्चितता को बहुत खूबसूरती से बयां करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि चाहे ज़िन्दगी थम जाए या हवा बनकर उड़ जाए, हमें बस उसे होते हुए देखना है। यह एक एहसास है कि जीवन का सार मंज़िल में नहीं, बल्कि इस सफर में है। हमें हर पल को महसूस करना चाहिए, क्योंकि वक़्त की रफ़्तार किसी के हाथ में नहीं होती।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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