कब तलक जी रुके ख़फ़ा होवे — मीर तक़ी मीर
कब तलक जी रुके ख़फ़ा होवे
आह करिए कि टक हवा होवे
“Until when will you remain displeased, / Oh, sigh, that the air might pass by.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
शायर पूछ रहा है कि आप कब तक नाराज़ रहेंगे, और कब तक यह हवा का झोंका गुज़र जाएगा।
विस्तार
यह शेर एक आशिक़ की बहुत गहरी और नज़ुक गुज़ारिश है। शायर यहाँ अपने महबूब से पूछ रहे हैं कि आप कब तक नाराज़गी में रहेंगे। दूसरी लाइन का मतलब समझिए—बस एक आह भरिए, और सारी नाराज़गी हवा हो जाएगी। यह एहसास दिलाता है कि ग़म या ग़ुस्सा कोई स्थायी चीज़ नहीं है। ये प्यार की वो हालत है, जहाँ थोड़ी सी पहल से सब कुछ ठीक हो जाता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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