हो उस से जहाँ सियाह तद भी — मीर तक़ी मीर

हो उस से जहाँ सियाह तद भी नाले में मिरे असर न होगा

“How can it be that even from that black source, My effect will not be in the stream?”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

हे उस से जहाँ स्याह तद भी, नाले में मेरे असर न होगा।

विस्तार

यह शेर शायर की अपनी मज़बूत पहचान को बयां करता है। मिर् तक़ी मीर कहते हैं कि जहाँ सबसे गहरा कालापन हो, सबसे गंदी जगह हो... वहाँ भी मेरा असर कम नहीं होगा। यह एक ज़बरदस्त दावा है अपनी रूह की मज़बूती का, कि बाहरी दुनिया की गंदगी या निराशा मेरे अंदर कभी दाग नहीं लगा सकती।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.