हम क़द्द-ए-ख़मीदा से आग़ोश हुए सारे — मीर तक़ी मीर

हम क़द्द-ए-ख़मीदा से आग़ोश हुए सारे पर फ़ाएदा तुझ से तो आग़ोश वो ख़ाली है

“We were embraced by the flow of praise, but the embrace from you is empty of use.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

हम क़द्द-ए-ख़मीदा से तो आलिंगन किए, पर तुझसे मिलने वाला आलिंगन तो व्यर्थ है।

विस्तार

यह शेर तारीफों और सच्चाई के बीच के गहरे अंतर को समझाता है। 'क़द्द-ए-ख़मीदा' का मतलब है झूठी या बहुत ज़्यादा तारीफ़ों से घिरा होना। शायर कह रहे हैं कि दुनिया ने हमें जितनी भी प्रशंसा की, हम उससे थक गए। असली सुकून तो उस 'खाली आगोश' में है, जो बिना किसी दिखावे के, बस अपना होना सिखाता है। यही जीवन का सबसे बड़ा सच है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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