देही को न कुछ पूछो इक भरत का है गड़वा — मीर तक़ी मीर

देही को न कुछ पूछो इक भरत का है गड़वा तरकीब से क्या कहिए साँचे में की ढाली है

“Do not ask anything of the body, for it is a form of Bharat's design; What can be said of the figure, when it has been cast in a mold?”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

शरीर के बारे में कुछ मत पूछो, यह तो भरत का एक डिज़ाइन है; जब किसी आकृति को साँचे में ढाल दिया गया हो, तो उसके बारे में क्या कहा जा सकता है।

विस्तार

यह शेर हमें जीवन की उस अनजानी सच्चाई की बात कहता है, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। शायर कहते हैं कि कुछ चीज़ों का अस्तित्व ऐसा होता है कि आप उसके पीछे की तर्ज़-ओ-नज़रिया नहीं समझ सकते। जैसे कोई चीज़ साँचे में ढलकर आ जाती है, उसका मूल स्वभाव ही होता है। यह हमें सिखाता है कि हर चीज़ का एक रहस्य होता है, जिसे हमें स्वीकार करना चाहिए।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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