बेकस हूँ मुज़्तरिब हूँ मुसाफ़िर हूँ बे-वतन
दूरी-ए-राह बन मिरे हमराह कौन है
“I am helpless, I am restless, I am a stranger without a homeland; who is the companion on this path of distance?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मैं असहाय हूँ, बेचैन हूँ, मैं एक बेघर मुसाफ़िर हूँ; इस दूरी के रास्ते पर मेरा हमराह कौन है।
विस्तार
यह शेर ज़िंदगी के अकेलेपन और बेबसी को बयां करता है। शायर कहते हैं कि मैं न महरूम हूँ, न शांत, बस एक मुसाफ़िर हूँ और कहीं मेरा ठिकाना नहीं। वह पूछ रहे हैं कि इस लंबी, मुश्किल राह पर... मेरा हमसफ़र कौन होगा? यह सिर्फ़ साथ माँगना नहीं है, यह दिल का वह एहसास है जो अकेलापन महसूस करता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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