मुझ सोज़ बा'द-ए-मर्ग से आगाह कौन है
शम-ए-मज़ार मीर ब-जुज़ आह कौन है
“Who is aware of the sorrow after death, O lamp of the grave, who is aware of the sigh?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मृत्यु के बाद के दुःख से कौन आगाह है? ऐ कब्र की लौ, आह से कौन आगाह है?
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ मौत के बाद के दर्द की बात नहीं करता.... यह तो उस गहरे गम की बात है जो ज़िन्दगी से भी बड़ा होता है। शायर पूछ रहे हैं कि क्या कोई है.... जो मेरे उस दर्द को जानता है.... जो मेरे मज़ार की हवा में बसता है! यह दर्द सिर्फ़ सांसों में घुल जाता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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