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कभू लुत्फ़ से सुख़न क्या कभू बात कह लगा लिया यही लहज़ा लहज़ा ख़िताब है वही लम्हा लम्हा 'ताब है

Sometimes, what pleasure is there in speech, sometimes what is not said, sometimes a word is spoken, sometimes a talk is not given; this tone, this address, is every moment's reward.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

कभी-कभी वाणी के आनंद में क्या है, कभी क्या बात कह न दिया, कभी कोई शब्द बोल दिया, कभी कोई बात नहीं कही; यह लहजा, यह संबोधन, हर पल का इनाम है।

विस्तार

यह शेर सिर्फ़ बातों के बारे में नहीं है, बल्कि एहसास की गहराई के बारे में है। शायर हमें सिखाते हैं कि शब्दों से ज़्यादा शक्तिशाली आपका लहजा होता है। Mir Taqi Mir कहते हैं कि अगर आपने कोई बात नहीं कही, फिर भी आपका लहजा ही एक इक़रार है.... और जो लम्हा गुज़र रहा है, वही सबसे बड़ी सज़ा या इनाम है। यह वक़्त की नज़ाकत को बयान करता है!

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