तू जहाँ के बहर-ए-अमीक़ में सर पर हुआ न बुलंद कर
कि ये पंज-रोज़ा जो बूद है कसो मौज-ए-पुर का हबाब है
“Do not raise your head in the deep ocean of existence, / For this mere day-fasting is the froth of the powerful wave.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
तू जहाँ की गहरी लहरों में अपना सिर न ऊँचा कर, क्योंकि यह जो बस एक दिन का उपवास है, वह किसी शक्तिशाली लहर के झाग जैसा है।
विस्तार
यह शेर हमें ज़िंदगी की नश्वरता और हौसले का पाठ पढ़ाता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि जीवन के गहरे सागर में अपना सिर मत उठाना (यानी घबराना मत), क्योंकि ये जो पाँच दिनों का रोज़ा है न... ये तो बस किसी गुज़रती हुई लहर का झाग मात्र है। इसका मतलब है कि जीवन की परेशानियाँ अक्सर अस्थायी होती हैं और हमें घबराना नहीं चाहिए।
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