नहीं खुलतीं आँखें तुम्हारी टक कि मआल पर भी नज़र करो — मीर तक़ी मीर

नहीं खुलतीं आँखें तुम्हारी टक कि मआल पर भी नज़र करो ये जो वहम की सी नुमूद है उसे ख़ूब देखो तो ख़्वाब है

“Your eyes do not open, look at the scale too. Look closely at this illusionary sight; it is a dream.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

तुम्हारी आँखें नहीं खुलतीं, तो एक बार मआल पर भी नज़र करो। यह जो भ्रम जैसी नज़ारा है, उसे ख़ूब देखो, तो यह ख़्वाब है।

विस्तार

यह शेर नज़रों के भ्रम और हक़ीक़त के रिश्ते को समझाता है। शायर कहते हैं कि किसी चीज़ को बस देखना काफ़ी नहीं है; हमें उस भ्रम की तह तक जाना होगा। जो चीज़ हमें इतनी ठोस और सच्ची लगती है, वह महज़ एक वहम है। इस एहसास को समझना ही ज़िंदगी का सबसे बड़ा सच है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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