चलो मय-कदे में बसर करें कि रही है कुछ बरकत वहीं — मीर तक़ी मीर
“Let us spend time in the abode of love, for there remains some grace; / The lips of the beloved are a kebab, and the wine of the parents.”
अर्थ
चलो मय-कदे में बसर करें कि रही है कुछ बरकत वहीं। लब-ए-नाँतोवाँ का कबाब है, दम-ए-आबवाँ का शराब है। इसका अर्थ है कि हमें प्रेम के धाम में समय बिताना चाहिए क्योंकि वहाँ अभी भी कुछ कृपा बची है। प्रिय के होंठ कबाब जैसे हैं और माता-पिता का सार (या शराब) है।
विस्तार
यह शेर मय-कदे (शराबखाने) के नशा भरे माहौल को समर्पित है, जो असल में इश्क़ की हालत का प्रतीक है। शायर कहते हैं कि क्योंकि उस जगह पर अभी भी कुछ नशा और सुकून बाकी है, तो हमें वहीं बिताना चाहिए। और दूसरी लाइन देखिए, यह कितनी ख़ूबसूरत उपमा है! महबूब के होंठ कबाब की तरह लज़ीज़ हैं, और महबूब की साँस ही शराब से कम नहीं। यह इश्क़ के मदहोश आलम का बयान है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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