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रहे हाल दिल का जो एक सा तो रुजूअ' करते कहीं भला सो तू ये कभू हमा दाग़ है कभू नीम-सोज़ कबाब है

If the heart's condition remains the same, then to whom should it turn? O you, know that sometimes it is a stain, and sometimes it is a kebab of neem-soreness.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

दिल की हालत अगर एक जैसी रहे, तो यह कहाँ मुड़कर देखेगा? ऐ तू, यह कभी हमारा दाग़ है और कभी नीम की जलन से बना कबाब है।

विस्तार

यह शेर आशिक़ के दिल की उलझन को बहुत गहराई से बयां करता है। शायर पूछते हैं कि अगर दिल की हालत में कोई बदलाव नहीं आया, तो वापस आकर क्या पाना है? दूसरी लाइन बताती है कि यह दिल कितना विरोधाभासी है—कभी दाग़ है, कभी कड़वा, नीम जैसा कबाब। यह शायरी दिल की जटिलता और उसके दर्द को दर्शाती है।

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