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जो वो लिखता कुछ भी तो नामा-बर कोई रहती मुँह में तिरे निहाँ तिरी ख़ामुशी से ये निकले है कि जवाब ख़त का जवाब है

If you write anything, my name remains in your mouth, in your hidden corners; from your silence, this has emerged, that it is the reply to a letter's reply.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

अगर तुम कुछ भी लिखोगे, तो मेरा नाम तुम्हारे ज़ुबान पर रहेगा, तुम्हारे मन के कोने में; तुम्हारी खामोशी से यह निकला है कि यह एक जवाब के जवाब में दिया गया जवाब है।

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर साहब ने ख़ामोशी की ताक़त पर लिखा है। शायर कहते हैं कि अगर कोई कुछ भी लिखता है, तो भी ज़ुबान पर कोई न कोई बात रह जाती है। लेकिन सबसे बड़ी बात... जो उनकी ख़ामोशी से निकली है, वह जवाब-ए-ख़त है! यानी, खामोशी में ही जवाब छिपा है।

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