मिरी ख़ल्क़ महव-ए-कलाम सब मुझे छोड़ते हैं ख़मोश कब — मीर तक़ी मीर

मिरी ख़ल्क़ महव-ए-कलाम सब मुझे छोड़ते हैं ख़मोश कब मिरा हर्फ़ रश्क-ए-किताब है मरी बात लिखने का बाब है

“My people abandon me in silence, how long must I wait? My word is a jealous book; writing my talk is my destined path.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

मेरी भीड़ महब-ए-कलाम से मुझे खामोश कर देती है, कब तक इंतज़ार करूँ? मेरा शब्द एक ईर्ष्यालु किताब है; मेरी बात लिखना मेरा नियत किया हुआ रास्ता है।

विस्तार

यह शेर एक कलाकार की आंतरिक बेचैनी को दर्शाता है। शायर महसूस करते हैं कि दुनिया, जो कलाम और शायरी के नशे में डूबी है, उन्हें चुप करा देती है। लेकिन वो कहते हैं कि उनका एक-एक हर्फ़, किताब के लिए ईर्ष्या का कारण है। यानी उनकी अपनी बातों में एक ऐसी शक्ति है, जो लिखी जानी चाहिए!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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