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रमक़ एक जान-ए-वबाल है कोई दम जो है तो अज़ाब है दिल-ए-दाग़ गश्ता कबाब है जिगर गुदाख़ता आब है

The mere mention of a life-at-risk is torment; when life itself is present, it is agony. This heart, stained with wounds, is like a kebab; the liver, yearning for water.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

रमक़ एक जान-ए-वबाल है कोई दम जो है तो अज़ाब है। दिल-ए-दाग़ गश्ता कबाब है जिगर गुदाख़ता आब है।

विस्तार

यह शेर इश्क़ के गहरे और दर्द भरे एहसास को बयान करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर यहाँ महबूब की तारीफ़ नहीं कर रहे, बल्कि उसके ज़हर जैसे असर की बात कर रहे हैं। शायर कहते हैं कि महबूब एक खतरनाक जादू है, और इस प्यार ने दिल को दाग़दार कबाब जैसा बना दिया है.... और जिगर बस पानी के लिए तड़प रहा है। यह है विरह की सबसे गहरी पीड़ा!

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