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रखो आरज़ू मय-ए-ख़ाम की करो गुफ़्तुगू ख़त-ए-जाम की कि सियाह कारों से हश्र में हिसाब है किताब है

Keep the yearning for the wine-like intoxication, and converse about the letter of the cup; for in the gathering of the dark-haired ones, there is neither an account nor a book.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

मय-ए-ख़ाम (wine-like intoxication) के लिए अपनी चाहत बनाए रखना, और जाम के ख़त (cup's letter) पर बातें करना; क्योंकि काले बालों वाले लोगों के जमावड़े में न हिसाब है और न किताब।

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर का एक गहरा नज़रिया है जो नियति और अंजाम के बारे में बात करता है। शायर कहते हैं कि हमें अपनी आरज़ू को ज़िंदा रखना चाहिए, और जाम और ख़त-ए-जाम से बात करनी चाहिए। क्यों? क्योंकि जब हिसाब-किताब का दिन आएगा, तो उन 'सियाह कारों' के गुनाहों का न कोई हिसाब होगा और न कोई किताब। इसका मतलब है कि हमें वर्तमान में जीना चाहिए और अपनी भावनाओं को ज़िंदा रखना चाहिए।

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