हुआ दफ़्तर-ए-क़ैस आख़िर अभी याँ
सुख़न है जुनूँ के अवाएल का अपने
“From the office of Qais, finally, where is it now? / Is it merely the beginning of the madness of poetry?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
दफ़्तर-ए-क़ैस (क़ैस का कार्यालय) आखिरकार अभी यहाँ हो गया है। क्या यह केवल अपने जुनून की शायरी की शुरुआत है।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर साहब ने शायरी के सबसे गहरे पहलू को छूते हुए कहा है। 'दफ़्तर-ए-क़ैस' एक बहुत बड़ा, स्थापित प्रेम का किस्सा है। शायर कहते हैं कि जब हम किसी महान प्रेम के ठिकाने पर पहुँचते हैं, तो बात महज़ किस्सों की नहीं होती। बात होती है अपनी, अपने अंदर के जुनून की शुरुआत की! यह अहसास दिलाता है कि सबसे बड़ी कहानी बाहर नहीं, बल्कि दिल के अंदर होती है।
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