जो ख़ोशा था सद ख़िर्मन-ए-बर्क़ था याँ
जलाया हुआ हूँ मैं हासिल का अपने
“Whether the treasury of the lightning was once glorious or not, I have burned the gains of my own hands.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
चाहे बिजली का खजाना कभी शोभित था या नहीं, मैंने अपने ही हासिल को जला दिया है।
विस्तार
यह शेर आत्म-विनाश की दर्दनाक सच्चाई को बयां करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि जीवन की जो चीज़ें कभी बेहद ख़ूबसूरत थीं, वे अब ख़राब हो चुकी हैं। और ये ख़राबी किसी बाहरी वजह से नहीं आई, बल्कि वक्ता ने खुद अपने हाथों से जला दी है। यह गहरे आत्म-मंथन का पल है, जब इंसान अपनी कमज़ोरी को स्वीकार करता है।
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