इतना ख़िज़ाँ करे है कब ज़र्द रंग पर याँ
तू भी कसो निगह से ऐ गुल जुदा रहा है
“When has autumn so painted the yellow hue, or dear bloom, please keep your gaze with me, for you are apart.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
अर्थात, जब पीले रंग पर इतना पतझड़ आया, हे गुल, तू भी अपनी निगाह से ऐसा रख कि तू मुझसे दूर न हो।
विस्तार
यह शेर विरह और तन्हाई के गहरे एहसास को बयान करता है। शायर पूछ रहे हैं कि ये पीलापन और ये उदासी कब थमेगी? वो अपने महबूब से कह रहे हैं कि आप अपनी निगाहों से मुझे दूर कर दीजिए, जैसे मौसम अपने रंग बदलते हैं। यह एक दर्दभरा लेकिन सच्चा इकरार है, जहां शायर कहता है कि इस दर्द से मुक्ति पाना ही बेहतर है।
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