वे लुत्फ़ की निगाहें पहले फ़रेब हैं सब — मीर तक़ी मीर
वे लुत्फ़ की निगाहें पहले फ़रेब हैं सब
किस से वो बे-मुरव्वत फिर आश्ना रहा है
“The glances of infatuation are all a deception; To whom does that shameless one continue to show affection?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
ये कृपा या प्रेम की निगाहें सब धोखा हैं; वह निर्लज्ज किस से फिर से स्नेह कर रहा है।
विस्तार
यह शेर आशिक़ के दिल का दर्द बयां करता है। शायर कहते हैं कि महबूब के वो सारे लुत्फ़ भरे नज़ारे, वो सारी निगाहें... वो सब फ़रेब हैं। सबसे ज़्यादा तकलीफ इस बात की है कि महबूब बार-बार, बिना किसी शर्म के, फिर से अपना इश्क़ शुरू कर रहा है। यह बेवफ़ाई और उम्मीद के टूटने का दर्द है।
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