मत बैठ बहुत इश्क़ के आज़ुर्दा दिलों में — मीर तक़ी मीर

मत बैठ बहुत इश्क़ के आज़ुर्दा दिलों में नाला कसू मज़लूम का तासीर न कर जाए

“Do not sit in the hearts of lovers, so deep and profound, Lest the misery of the oppressed should spoil your grace and sound.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

इश्क़ से भरे हुए आज़ाद दिलों में मत बैठ, कहीं मज़लूम के दर्द का असर तुम्हारे सौंदर्य और सुकून को बिगाड़ न दे।

विस्तार

देखिए, शायर जी यहाँ एक बहुत ही गहरी चेतावनी दे रहे हैं। वह कह रहे हैं कि इश्क़ के रंग में बहुत ज़्यादा डूबना खतरनाक है। ये जो आज़ुर्दा दिल है न, ये प्रेम के रंग से नीला हो जाता है। लेकिन शायर कहते हैं कि इस रंग में ज़्यादा देर मत रुकना.... क्योंकि इस इश्क़ के नशा में, ग़म और दर्द का असर होकर आप को पूरी तरह डुबो देगा! यह प्रेम की खूबसूरती और उसके खतरे, दोनों को बयां करता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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