है तुर्फ़ा मुफ़त्तिन-निगह उस आइना-रू की — मीर तक़ी मीर

है तुर्फ़ा मुफ़त्तिन-निगह उस आइना-रू की इक पल में करे सैंकड़ों ख़ूँ और मुकर जाए

“The mirror of those who are careless in their gaze, In an instant shows hundreds of wounds, and then turns away.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

जो लोग लापरवाही से देखते हैं, उनके नज़रों का आईना एक पल में सैकड़ों घाव दिखाता है और फिर मुकर जाता है।

विस्तार

ये शेर सिर्फ़ आईने की बात नहीं करता, ये तो नज़रों के धोखे की बात करता है। शायर कह रहे हैं कि किसी की नज़र या किसी रिश्ते का एहसास इतना गहरा होता है कि वो एक पल में आपको सब कुछ दिखा देता है—जैसे सैंकड़ों आँसू। लेकिन फिर वो पल भर में मुकर जाता है, जैसे कुछ हुआ ही न हो। यह क्षणभंगुरता और धोखे का बेहतरीन तस्वीर है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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