अब जान जिस्म-ए-ख़ाकी से तंग आ गई बहुत
कब तक इस एक टोकरी मिट्टी को ढोईए
“I have become weary of this mortal body, How long must you carry this single basket of earth?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मेरा मन इस नश्वर शरीर से बहुत तंग आ चुका है; आप कब तक इस एक टोकरी मिट्टी को उठाते रहेंगे।
विस्तार
यह शेर जीवन के गहन थकावट और अस्तित्व के बोझ को बयां करता है। शायर कहते हैं कि जिस्म-ए-ख़ाकी (मिट्टी का शरीर) से अब जान तंग आ गई है। यह केवल शारीरिक थकान नहीं है, बल्कि ज़िंदगी के उन सारे बोझों का एहसास है, जिन्हें हम एक टोकरी की तरह ढोते रहते हैं। यह एक गहरी, रूहानी बेचैनी है।
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