किस तौर आँसुओं में नहाते हैं ग़म-कशाँ — मीर तक़ी मीर

किस तौर आँसुओं में नहाते हैं ग़म-कशाँ इस आब-ए-गर्म में तो न उँगली डुबोइए

“How do you bathe in tears, oh sorrow-wearer? Do not dip your finger in this warm water.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

शायर पूछ रहा है कि तुम किस तरह आँसुओं में नहाते हो, ऐ ग़म-कशाँ। यह गर्म पानी है, इसमें अपनी उँगली मत डुबोना।

विस्तार

यह शेर सिर्फ़ आँसुओं की बात नहीं करता, बल्कि दिल के ज़ख्मों की गहराई को दिखाता है। शायर कह रहे हैं कि ग़म में जीना, आँसुओं में नहाना... यह एक बहुत दर्दनाक और जलने जैसा एहसास है। यह इशारा है कि आप अपने गमों में इतने डूब गए हैं कि अब आपको खुद को संभालना होगा। यह एक नज़दीकी चेतावनी है, जो हमें दर्द से बाहर निकालने की कोशिश करती है।

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