तू ही ज़माम अपनी नाके तुड़ा कि मजनूँ — मीर तक़ी मीर

तू ही ज़माम अपनी नाके तुड़ा कि मजनूँ मुद्दत से नक़्श-ए-पा के मानिंद राह पर है

“O, you who are the world, did you break your nose, O Majnun? / For a long time, it has been like a path marked by your feet.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

हे ज़माम, तुमने अपनी नाक क्यों तोड़ी, हे मजनूँ? बहुत समय से, यह तुम्हारे पैरों के निशान के समान रास्ते पर है।

विस्तार

यह शेर जीवन की सबसे बड़ी विडंबना को बयां करता है। शायर कहते हैं कि किसी के टूटे हुए रास्ते का दोष न तो ज़माने का है, और न ही महबूब का। यह दोष तो खुद उस इंसान का है जो उस रास्ते पर चल रहा था। यह बात हमें सिखाती है कि अक्सर हम अपने ही हाथों से अपनी तकदीर को बिगाड़ देते हैं। यह एक गहरा आत्म-निरीक्षण है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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