अब रहम पर उसी के मौक़ूफ़ है कि याँ तो — मीर तक़ी मीर
अब रहम पर उसी के मौक़ूफ़ है कि याँ तो
नय अश्क में सरायत नय आह में असर है
“Now it is dependent upon his mercy, that either in new tears there is a solace, or in a new sigh there is an effect.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
अब दया उसी के पर निर्भर है कि या तो नए आँसू में शांति है या नए आह में असर है।
विस्तार
यह शेर एक बहुत गहरी भावना को बयां करता है—कि हमारा वजूद किसी के रहम पर टिकी है। शायर कहते हैं कि अब हम किसी सहारे पर नहीं हैं, बल्कि पूरी तरह से एक रहम पर निर्भर हैं। और यह रहम कहाँ से मिलेगा? बस एक नए आँसू में, या एक नई आह में! यह दिखाता है कि भावनाएं कितनी शक्तिशाली होती हैं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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